उंगलियां बालों में फेर रही थी उसके आंचल से मुख ढककर सोता रहा मन बेकरार इस तरह हो रहा था आज अपने दिल की हर बात कह दूं उसके प्यार तले मैं सराबोर हो गया कुछ अधूरे ख्वाब है जिसे पूरा करने की आस है प्यास ऐसी है बुझ नहीं सकती चाहे दे दो समंदर हम प्यासे हैं तुम्हारी मुस्कान को तुम मुस्कुराती रहो जिंदगी मिले
हिंदी शायरी संग्रह मनोज कुमार-Hindi shayari sangrah Manoj kumar